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44 को बीवी, 41 को पति, 6 को मिले बाप

Written By FUL MAZA MASTEE on Wednesday, January 15, 2014 | 1:28 AM

Jan 14, 2014, 07.04PM IST 22 Magh-mela इतनी भीड़ में लोग खोए भी तो मिल भी गए दिनेश चंद्र मिश्र, इलाहाबाद रीवा से आए राम उजागिर की 58 वर्षीय पत्नी दुलारी देवी संगमतट पर स्नान के बाद बिछड़ गईं तो उनके चेहरे पर चिंता की रेखाएं आंखों से जलधारा के रूप में बहने लगीं। 65 साल के राम उजागिर पर माघ मेले में सुरक्षा के लिए तैनात एक पुलिसकर्मी की निगाह पड़ी। वह उनकी बात सुनने के बाद मेले के कंट्रोल रूम में लेकर गया। कुछ देर में ही माघ मेला के लाउडस्पीकर से 'रीवा से आए रामउजागिर की पत्नी दुलारी लाल रंग की साड़ी पहनी है कहीं खो गयी है, बाये हाथ में जयश्रीकृष्ण का गोदना गोदवाया है।' सूचना प्रसारित होने लगी। इस सूचना के फैलने के आधे घंटे बाद रास्ता भटककर दूसरे सेक्टर में भीड़ के साथ चली गईं दुलारी को एक सिपाही लेकर कंट्रोल रूम में पहुंचा। राम उजागिर को देखकर दुलारी की बूढ़ी आंखें भी छलक पड़ीं। पति-पत्नी फिर पुलिसवालों को दूधो-नहाओ पूतो फलो सहित ढेरों आर्शीवाद देकर वहां से चले गए। संगमतट पर माघ मेले में बिछड़ने के किस्से तो तमाम फिल्मों में दिखाई दिए हैं, लेकिन इनके मिलने का जो दृश्य दिखाई पड़ा, उसका रेती का कण-कण गवाह है। मकर संक्रांति के स्नान के साथ हुए माघ मेले के आगाज के दौरान 91 लोगों को पुलिस ने अपनों से मिलाने का काम किया। मेले के सुरक्षा प्रभारी एके पाण्डेय ने बताया कि इसमें 44 की पत्नी जहां मेले में स्नान के बाद गुम हो गई थीं, वहीं 41 अपने पति से बिछड़ गईं। साथ ही 6 बच्चे अपने अपने मां-बाप से अलग हो गए थे। इन लोगों को मिलवाने का जो पुनीत काम संगम तट पर हुआ वह काबिले-तारीफ है। राजस्थान से संगम में डुबकी लगाने आए रामप्रसाद मीणा की भी कहानी राम उजागिर की तरह है। पुरुषों के साथ संगम में हर-हर गंगे करके डुबकी लगाने के बाद जब वह बाहर निकले तो उनकी पत्नी स्नेहलता नहीं दिखीं। रामप्रसाद पत्नी को खोजने के लिए इस घाट से उस घाट का चक्कर लगाने लगे। मेले में लगे लाउडस्पीकर से खोया-पाया की सूचना पाने के बाद वह भी मौके पर पहुंचे। पत्नी के नहाने के बाद गुम होने की सूचना दर्ज होने के बाद स्नेहलता के हुलिये की खबर लाउडस्पीकर से गूंजने लगी। एक घंटे बाद रामप्रसाद की पत्नी भी मिल गई। [ जारी है ] कंट्रोल रूम में जिस समय रामप्रसाद और स्नेहलता का मिलन हो रहा था, उसी समय कंट्रोल रूम में फतेहपुर की गीता देवी अपने गुम पति की याद में रोते हुए पहुंचीं। गीता के पति विवेक यादव स्नान के दौरान बिछड़ गए थे। गीता लगातार रोए जा रही थीं, महिला पुलिसकर्मी उनको ढांढ़स बंधा रही थी कि घबराओ मत, रात तक मिल जाएंगे। इंतजाम ऐसा है कि हर बिछड़े हुए को मिला दिया जाएगा। गीता के कंट्रोल रूम पहुंचने के बाद लाउडस्पीकर से विवेक यादव के बारे में सूचना प्रसारित होने लगी। दो घंटे बाद विवेक यादव और गीता फिर एक-दूजे के हो गए। मम्मी-पापा के साथ आया भदोही का 7 वर्षीय बबलू भी उनसे बिछड़ने के बाद रोने लगा। घाट पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी की निगाह बबलू पर पड़ी। बबलू मां-बाप का नाम भी बता नहीं पा रहा था। 'काली पैंट, लाल रंग की जैकेट पर पीले रंग की ऊन की टोपी लगाए एक बच्चा मिला है। मम्मी-पापा का नाम नहीं बता पा रहा है। जिस किसी का बच्चा हो, कंट्रोल रूम में संपर्क करे।' इस सूचना के आधे घंटे बाद बबलू के पापा कंट्रोल रूम पहुंचे तो वह उनको देखकर पापा-पापा कहते हुए सीने से चिपक गया। अपनों से अपनों को मिलाने के ये मार्मिक नजारे माघ मेले के आगाज के दिन ही खूब दिखाई दिए।
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