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Mon, 27 Jan 2014 09:14 PM (IST)
हैमिल्टन। सीरीज के तीसरे वनडे मुकाबले में रोमांचक टाई के बाद अब भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अगले दोनों मैचों में अपने जुझारुपन का प्रमाण देना होगा, जाहिर है कि कीवी टीम पहले दोनों मुकाबले जीतकर 2-0 से आगे है और अब भारत को अगले दोनों मैच जीतने ही होंगे व इस 'डबल' परीक्षा में किसी भी हालत में पास होना ही होगा, एक भी अन्य मैच जीतने पर खिताब कीवी टीम के पास चला जाएगा। तीसरा मुकाबला कल मंगलवार को हैमिल्टन के उसी सिडोन पार्क में खेला जाएगा जहां दूसरे मुकाबले में मेजबान टीम ने भारत को 15 रनों (डीएल नियम) से पस्त किया था।
धौनी के धुरंधरों को इस बात की खुशी है कि उनकी टीम कम से कम पांच मैचों की सीरीज ड्रॉ करा सकती है। भारतीय टीम अगर तीसरा वनडे जीत जाती तो वह सीरीज जीतने के बारे में सोच सकती थी। लेकिन अब सीरीज जीत नहीं सकती तो कम से कम ड्रॉ की कोशिश तो कर सकती है। भारत को अब हैमिल्टन और वेलिंग्टन की परीक्षा को पास करना ही होगा।
भारत ने पिछले मैच में अपने संयोजन में बदलाव किया और यह उसके लिए लाभदायक रहा। दौरे में पहली बार लगा कि भारत की विराट कोहली पर निर्भरता कुछ कम हुई है। कोहली के न चलने के बावजूद टीम की ओर से कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, रवींद्र जडेजा और आर अश्विन ने अर्धशतक लगाए। वनडे क्रिकेट में यह पहला मौका है जब किसी टीम की ओर से छठे, सातवें और आठवें नंबर के बल्लेबाज ने अर्धशतक जमाए। हालांकि बल्लेबाजी में अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश है। शिखर धवन और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी ने अच्छी शुरुआत तो दी, लेकिन उनसे टीम को बड़ी पारी की दरकार है। मध्यक्रम में सुरेश रैना भी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पा रहे हैं। गेंदबाजी भारत के लिए सबसे चिंता का विषय बनी हुई है। इशांत शर्मा की जगह शामिल किए गए वरुण एरोन को हालात में ढलने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन शुरुआती दो मैचों में तेज आक्रमण की अगुआई करने वाले मुहम्मद शमी नेपियर में काफी खर्चीले साबित हुए।
इस मैदान पर हालांकि भारत का रिकॉर्ड बहुत उम्मीद नहीं जगाता है। टीम इंडिया ने यहां सात मैच खेले हैं, जिसमें से उसे सिर्फ दो में जीत मिली है। इन दो जीत में एक बार उसने मेजबान टीम को 11 मार्च, 2009 को 84 रन से हराया था, जबकि 7 मार्च, 1992 को जिंबाब्वे पर 55 रन से जीत दर्ज की थी।
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